
दशहरा 2025 | इतिहास, महत्व और भारत में उत्सव
दिनांक और तिथि
- दशहरा (विजयादशमी) 2025 को भारत में 2 अक्टूबर, 2025 (गुरुवार) को मनाया जाएगा।
- दशमी तिथि (Shukla Paksha, अश्विन मास) उसी दिन रहेगी।
महत्व
- यह त्योहार अच्छाई (धर्म) की बुराई (अधर्म) पर जीत का प्रतीक है।
- रामायण की कथा अनुसार, भगवान राम ने रावण का वध किया था।
- पूर्वांचल/उड़ीसा/बंगाल आदि में देवी दुर्गा की महिषासुर वध की कथा से जुड़ा है — नवरात्रि के एक अंत के रूप में।
उत्सव कैसे मनाया जाता है

- रामलीला का मंचन, जिसमें राम-रावण की कथा को नाटकीय रूप से प्रस्तुत किया जाता है।
- रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद की पुतलियों का निर्माण और उन्हें शाम में दहन किया जाना।
- मंदिरों में पूजा अर्चना, भजन कीर्तन, विशेष कार्य एवं परिवार/मित्रों के साथ मिलना-जुलना।
- कुछ जगहों पर मेले, रंगारंग कार्यक्रम एवं आतिशबाज़ी भी होती है।
रामलीला का मंचन
- जगह-जगह पर रामलीला आयोजित की जाती है।
- इसमें भगवान राम, लक्ष्मण, सीता और रावण की कथा नाटकीय रूप में प्रस्तुत की जाती है।
रावण दहन
- शाम के समय रावण, मेघनाद और कुंभकर्ण की विशाल पुतलियाँ बनाई जाती हैं।
- आतिशबाज़ियों और पटाखों के साथ इनका दहन किया जाता है, जो बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है।
मंदिरों में पूजा-अर्चना
- विशेष रूप से भगवान राम और माता दुर्गा की पूजा की जाती है।
- भक्त उपवास रखते हैं और विजय की कामना करते हैं।
नवरात्रि का समापन
- कई राज्यों में यह नवरात्रि उत्सव का अंतिम दिन होता है।
- बंगाल और पूर्वी भारत में इस दिन दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है।
सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रम
- मेले लगते हैं जहाँ झूले, खाने-पीने के स्टॉल और हस्तशिल्प की दुकानें होती हैं।
- लोग परिवार और मित्रों के साथ मिलकर उत्सव मनाते हैं।
शस्त्र पूजन और वाहन पूजन
- कुछ जगहों पर लोग अपने औज़ार, शस्त्र और वाहनों की पूजा करते हैं।
- यह परंपरा शक्ति और समृद्धि का प्रतीक मानी जाती है।
दशहरा 2025 | इतिहास, महत्व और भारत में उत्सव

संदेश: दशहरा हमें सिखाता है कि सत्य और धर्म की हमेशा विजय होती है, चाहे बुराई कितनी भी शक्तिशाली क्यों न लगे।
दशहरा पर कविता
रावण के दहन का त्योहार है आया,
सत्य और धर्म का संदेश है लाया।
राम ने दिया जग को यह सन्देश,
सत्य की राह चले, मिलेगा विशेष।
झूठ, अहंकार सब होते पराजित,
सच्चाई से जीवन होता है उज्ज्वलित।
रावण के संग जलते हैं दोष,
सीख हमें देता है यह पर्व ख़ास।
आओ मिलकर हम सब ये मानें,
सत्य और सद्गुण जीवन में लाएँ।
1. सत्य की विजय
रावण जलता, सन्देश सुनाता,
सत्य-असत्य का भेद बताता।
दशहरा है पर्व सदा यही गाता,
सत्य की राह ही सुख पहुँचाता।
2. रावण दहन
आकाश में चमके हैं पटाखों की रेखा,
रावण का पुतला गिरा ज़मीन पर देखा।
झूठ, अहंकार सब जल जाते हैं,
सत्य, धर्म से जीवन सज जाते हैं।
3. विजयादशमी का पर्व
नवरात्रि के बाद जो दिन है आता,
विजयादशमी पर्व कहलाता।
राम ने रावण का संहार किया,
सत्य और धर्म का प्रचार किया।

4. शिक्षा का संदेश
दशहरा हमें यही सिखलाता,
अंधकार को दीपक हर जाता।
सत्य और न्याय जहाँ भी रहते,
वहीं देवता आशीष देते।
5. मिलकर मनाएँ दशहरा
खुशियों का त्योहार है दशहरा,
सिखाता है हमें कुछ गहरा।
मिलकर सब यह पर्व मनाएँ,
मन से बुराई को दूर भगाएँ।
दशहरा 2025 | इतिहास, महत्व और भारत में उत्सव